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मलाड स्टेशन पर महिला को रास्ता देने की वजह से क्यों हुई प्रोफेसर की हत्या? CCTV फुटेज में कैद मलाड स्टेशन प्रोफेसर हत्या वारदात

By Anil

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मलाड स्टेशन प्रोफेसर हत्या
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मलाड स्टेशन प्रोफेसर हत्या मामला: मुंबई की लोकल ट्रेन में रोज़ाना लाखों लोग सफर करते हैं, लेकिन शनिवार शाम मलाड रेलवे स्टेशन पर जो हुआ, उसने इस रोज़मर्रा की यात्रा को डरावना बना दिया। यहां 33 वर्षीय प्रोफेसर आलोक कुमार सिंह की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। वजह कोई पुरानी रंजिश नहीं, बल्कि एक सामान्य-सी इंसानी हरकत थी। इस घटना ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि लोकल ट्रेन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सामने आते ही यह खबर तेजी से ट्रेंड करने लगी।

मलाड स्टेशन पर प्रोफेसर की हत्या क्यों हुई

यह घटना Malad Railway Station पर शनिवार शाम करीब 5:25 बजे हुई। बोरीवली स्लो लोकल ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुंची थी और डिब्बे में भारी भीड़ थी। यात्री उतरने और चढ़ने की जल्दी में थे। उसी दौरान आलोक सिंह दरवाजे के पास खड़े थे और उन्होंने अपने आगे खड़ी एक महिला यात्री को पहले उतरने दिया। यही बात पीछे खड़े युवक को नागवार गुज़री और दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह बहस कुछ सेकंड में हिंसा में बदल जाएगी।

कौन थे प्रोफेसर आलोक सिंह, कैसा था उनका स्वभाव

आलोक कुमार सिंह पेशे से प्रोफेसर थे और मुंबई के एक कॉलेज में पढ़ाते थे। परिवार और रिश्तेदारों के अनुसार वे बेहद शांत, संयमी और मददगार स्वभाव के इंसान थे। वे कभी किसी झगड़े में शामिल नहीं होते थे और अक्सर विवाद को सुलझाने की कोशिश करते थे। उस दिन भी वे कॉलेज से काम खत्म कर अपने घर लौट रहे थे। उनके साथ उनके प्रोफेसर मित्र सुधीर त्रिवेदी भी यात्रा कर रहे थे। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह रोज़ का सफर आखिरी बन जाएगा।

मलाड स्टेशन प्रोफेसर हत्या मामला
मलाड स्टेशन पर महिला को रास्ता देने की वजह से क्यों हुई प्रोफेसर की हत्या?

दोस्त साथ थे, डिब्बे में भीड़ थी, फिर भी नहीं बच सकी जान

घटना के समय आलोक सिंह के साथ सुधीर त्रिवेदी उसी डिब्बे में मौजूद थे। दोनों दरवाजे के पास भीड़ में खड़े होकर यात्रा कर रहे थे। आसपास कई अन्य यात्री भी थे, जिनमें महिलाएं शामिल थीं। बहस बढ़ते ही माहौल तनावपूर्ण हो गया, लेकिन किसी को हस्तक्षेप करने का मौका नहीं मिला। अचानक आरोपी ने जेब से धारदार औजार निकाल लिया। सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि कोई कुछ समझ ही नहीं पाया।

पॉलिश पाना से किया गया हमला, मच गया हड़कंप

पुलिस जांच के अनुसार आरोपी ने पॉलिश पाना नाम के औजार से आलोक के पेट के बाईं ओर वार किया। हमला इतना तेज और अचानक था कि आलोक वहीं गिर पड़े। आरोपी को खुद अंदाज़ा नहीं था कि यह वार जानलेवा साबित होगा। डिब्बे में अफरा-तफरी मच गई और यात्रियों में चीख-पुकार शुरू हो गई। लोग मदद के लिए चिल्लाने लगे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

CCTV फुटेज में कैसे कैद हुई पूरी वारदात

हमले के तुरंत बाद आरोपी ट्रेन से उतर गया और स्टेशन से बाहर की ओर भागने लगा। वह भागते वक्त बार-बार पीछे मुड़कर देख रहा था, जिससे साफ था कि वह घबराया हुआ है। शोर बढ़ने पर वह रेलवे ओवरब्रिज से होते हुए कुरार विलेज की ओर निकल गया। बाद में स्टेशन पर लगे CCTV कैमरों में आरोपी भागते हुए साफ दिखाई दिया। यही फुटेज पुलिस के लिए सबसे अहम सबूत बना

आरोपी को नहीं थी मौत की जानकारी, ऐसे हुई गिरफ्तारी

पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसे यह नहीं पता था कि घायल व्यक्ति की मौत हो गई है। वह रविवार को रोज़ की तरह काम पर जाने की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान पहले से सतर्क पुलिस ने कुरार विलेज में उसके घर पर दबिश दी। आरोपी को वहीं से गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, हत्या में इस्तेमाल किया गया पॉलिश पाना अभी तक बरामद नहीं हो सका है।

पुलिस कार्रवाई और कानूनी पहलू

इस मामले में Borivali GRP ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज किया है। आरोपी को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और सभी सबूत जुटाए जा रहे हैं।

मलाड स्टेशन प्रोफेसर हत्या
Malad Railway Station professor murder CCTV footage

स्टेशन की सुरक्षा और मेडिकल सुविधा पर उठे सवाल

घटना के बाद आलोक सिंह के परिजनों ने स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि घटना के वक्त आरपीएफ और जीआरपी मौके पर क्यों मौजूद नहीं थी। इसके अलावा स्टेशन पर तत्काल मेडिकल सुविधा नहीं होने की बात भी सामने आई। पुलिस का दावा है कि घायल को 45–46 मिनट में अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

निष्कर्ष: एक छोटी बहस ने छीन ली एक जान

मलाड रेलवे स्टेशन पर हुई यह घटना दिखाती है कि गुस्से और जल्दबाज़ी में लिया गया एक फैसला कितना खतरनाक हो सकता है। एक महिला यात्री को पहले उतरने देना कोई गलत बात नहीं थी, बल्कि यह इंसानियत की मिसाल थी। लेकिन उसी छोटी सी बात को लेकर हुआ विवाद एक निर्दोष व्यक्ति की जान ले गया। इस घटना ने एक परिवार को हमेशा के लिए तोड़ दिया और लोकल ट्रेन में सफर करने वाले हर व्यक्ति की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए। जरूरत है कि लोग धैर्य रखें और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को भी और मजबूत किया जाए।

Anil

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