PMAY-G To MGNREGA Big Update: पश्चिम बंगाल के ग्रामीण विकास से जुड़ा यह मामला एक दिन में नहीं बना। इसकी जड़ें 2022 में गए उस फैसले तक जाती हैं, जब केंद्र और राज्य के बीच MGNREGA और PMAY-G को लेकर विवाद तेज हो गया था। उसी दौर में केंद्र ने पश्चिम बंगाल में MGNREGA फंड रोक दिए थे, और बाद के महीनों में यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर बड़ा बन गया। जून 2026 तक आते-आते तस्वीर फिर बदली, जब ग्रामीण विकास, रोजगार, सड़क, पेंशन और आवास को जोड़कर एक नया पैकेज सामने आया।
शुरुआत कैसे हुई: और 2022 में क्यों हुआ था विवाद
इस पूरे प्रोजेक्ट की शुरुआत दरअसल किसी एक नई घोषणा से नहीं, बल्कि पुराने विवाद से समझी जा सकती है। 2022 में केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में MGNREGA फंड रोक दिए थे। उस समय केंद्र का तर्क था कि जांच में कई जिलों में अनियमितताएं मिलीं और राज्य को सुधारात्मक कदम उठाने थे। बाद में यह मुद्दा लगातार उठा और ग्रामीण रोजगार, पक्का घर, और पंचायत स्तर पर कामों पर इसका असर दिखाई देने लगा।
केंद्र की तरफ से यह भी कहा गया कि 2019 से 2022 के बीच 19 जिलों में जांच हुई और MGNREGA कामों में गंभीर गड़बड़ियां मिलीं। दूसरी तरफ राज्य सरकार और विपक्ष इसे भेदभाव बताता रहा। इस टकराव का असर सिर्फ फंड पर नहीं पड़ा, बल्कि ग्रामीण परिवारों की नौकरी, घर और बुनियादी ढांचे की योजनाओं पर भी पड़ा। यही वजह है कि बंगाल का यह rural development issue धीरे-धीरे एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विषय में बदल गया।
PMAY-G में क्या हुआ: घरों की योजना आगे बढ़ी, लेकिन प्रक्रिया धीमी रही
PMAY-G यानी Pradhan Mantri Awaas Yojana-Gramin इस कहानी का दूसरा बड़ा हिस्सा है। केंद्र सरकार ने 2025 में इस योजना को FY 2024-25 से 2028-29 तक पाँच साल के लिए बढ़ाया और 2 करोड़ अतिरिक्त ग्रामीण घरों का लक्ष्य रखा। इसी के साथ Awaas+ 2024 mobile app के जरिए नया सर्वे भी शुरू किया गया, ताकि नए पात्र परिवारों की पहचान हो सके। यह साफ संकेत था कि केंद्र ग्रामीण आवास कार्यक्रम को फिर से तेज करना चाहता है।
West Bengal सरकार की अपनी साइट के मुताबिक राज्य में PMAY-G के तहत करोड़ों नहीं, बल्कि लाखों घर पहले ही पूरे किए जा चुके हैं। राज्य विभाग के पेज पर 34,05,739 houses completed दिखाए गए हैं, और यह भी लिखा है कि योजना 2016-17 से चल रही है। इससे पता चलता है कि बंगाल में rural housing का आधार पहले से मौजूद था, लेकिन बीच के वर्षों में funding और verification विवादों ने इसकी रफ्तार धीमी कर दी।
जून 2026 का बड़ा अपडेट: ₹4000 करोड़ पैकेज और 10 लाख घर
अब कहानी के सबसे ताज़ा मोड़ पर आते हैं। 10 जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार केंद्र ने पश्चिम बंगाल के लिए ₹4000 करोड़ के rural package को मंजूरी दी। इसमें ₹1700 करोड़ कृषि विकास, ₹1000 करोड़ ग्रामीण सड़कों, ₹600 करोड़ ग्रामीण पेंशन और ₹700 करोड़ ग्रामीण रोजगार योजनाओं के लिए बताए गए। इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि PMAY-G के तहत 10 लाख घर बनाए जाएंगे।
यही वह अपडेट है जिसने पूरे मामले को फिर से चर्चा में ला दिया। Awaas Plus 2024 survey को 25 जून तक पूरा करने की बात कही गई, ताकि पात्र लाभार्थियों की final list तैयार हो सके। मतलब यह कि अब फोकस सिर्फ घोषणा पर नहीं, बल्कि beneficiary identification, fund distribution और ground execution पर है। इस स्तर पर project की असली परीक्षा शुरू होती है, क्योंकि अब काम को कागज से निकलकर गांवों तक पहुंचना है।
MGNREGA और रोजगार: बंदी से लेकर नए framework
MGNREGA इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील हिस्सा रहा है। PIB के 20 अप्रैल 2026 वाले briefing में मंत्रालय ने कहा कि MGNREGA तब तक पूरी तरह operational रहेगा जब तक proposed VB–G RAM G Act लागू नहीं हो जाता। उसी briefing में यह भी बताया गया कि लगभग ₹17,744 करोड़ wage component के लिए जारी किए जा रहे हैं, और proposed framework के तहत 125 days wage employment का enhanced guarantee देने की योजना है।
इसके बाद 9 जून 2026 की PIB release में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने बताया कि सरकार पहले ही MGNREGA के तहत ₹30,000 करोड़ allocate कर चुकी है और अब ₹95,692 करोड़ की interim allocation राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को जारी की गई है। इसके साथ total allocation ₹1.25 lakh crore से ऊपर जाने की बात कही गई। मंत्री ने यह भी कहा कि 1 जुलाई 2026 से काम तेज़ी से शुरू हो सके, इसके लिए राज्यों को पहले से approvals देने चाहिए। यह संकेत देता है कि rural employment को नई administrative structure के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
अब तक ज़मीनी स्तर पर क्या-क्या हुआ और आगे क्या होगा
जून 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक बंगाल सरकार ने MGNREGA-style rural job works को फिर से शुरू करने की बात कही, और rural job schemes में 125 days work guarantee का उल्लेख किया। उसी रिपोर्ट में यह भी लिखा गया कि PMGSY के तहत 2,790 km roads और 45 bridges के लिए ₹2,500 करोड़ की in-principle approval भी मिल चुकी है। यानी अब पूरा rural development push सिर्फ आवास तक सीमित नहीं, बल्कि सड़क, पुल, रोजगार और connectivity तक फैल गया है।
West Bengal की PMAY-G progress page और central PIB updates को साथ देखें तो साफ है कि यह project तीन चरणों से गुजरा है: पहले विवाद और रोक, फिर survey और policy extension, और अब funding plus execution phase। 2026 में जो ₹4000 करोड़ package आया है, वह इसी लंबे buildup का नतीजा है। आगे असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि survey कितनी सही तरह से complete होता है, funds कितनी जल्दी transfer होते हैं, और जिला स्तर पर काम कितनी speed से शुरू होता है। अभी तक की तस्वीर यही बताती है कि यह योजना अब paper stage से निकलकर implementation stage में जा रही है।

